प्रयागराज शहर के भीतर प्रवेश करते ही चाहे जिस दिशा में जाइए, आपका सामना टूटी-फूटी सड़कों, सड़कों के किनारे टूटे-फूटे मकान और दुकान, आस-पास बेतरतीब बिखरे पड़े मलबे और ऊपर उड़ते धूल के ग़ुबार से ही होगा.
इस दौरान शहर का इतिहास तक बदल गया यानी, इलाहाबाद प्रयागराज हो गया. छह साल के अंतराल पर आने वाला अर्धकुंभ, कुंभ हो गया और बारह साल बाद आने वाला कुंभ बदलकर महाकुंभ हो गया. लेकिन शहर को सुंदर बनाने के लिए तोड़-फोड़ का जो सिलसिला शुरू हुआ, वो तीस नवंबर की डेडलाइन ख़त्म होने के बावजूद अंजाम तक नहीं पहुंच पाया है.
कुंभ मेला शुरू होने में अब महज़ एक महीना बचा है.
गंगा किनारे 'तंबुओं का शहर' बसना शुरू हो गया है लेकिन रेतीली धरती पर बने उस अस्थायी शहर को प्राणवायु देने वाले इस स्थाई शहर की सांस जैसे धूल के ग़ुबार में अटकी हुई है. शहर के लोगों का ही नहीं, अब तो हाईकोर्ट का भी धैर्य जवाब देने लगा है.
ल के ग़ुबार के ढका हुआ है शहर
एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान चार दिन पहले हाईकोर्ट ने सख़्त टिप्पणी की. कहा, "क्या राज्य सरकार कार्यों की मॉनिटरिंग नहीं कर रही है? जिस तरह से काम हो रहा है, कुंभ मेले तक इसके पूरा होने की उम्मीद नहीं दिखती. पूरा शहर धूल के ग़ुबार से भरा हुआ है."
यही सवाल शहर का हर बाशिंदा पूछ रहा है.
रेलवे स्टेशन से मुख्य शहर को जाने वाली सड़क लीडर रोड पर जॉनसेनगंज चौराहा शहर के सबसे पुराने, व्यस्ततम और प्रमुख चौराहों के रूप में जाना जाता है. सड़क चौड़ी करने के लिए इस चौराहे के चारों कोनों की इमारतें गिरा दी गई हैं और किनारे के मकान और दुकान के जो हिस्से इसमें अवरोध पैदा कर रहे थे, उन्हें भी ढहा दिया गया है.
'सड़क चौड़ी होने से लोगों को आराम मिलेगा, ट्रैफ़िक जाम की समस्या से राहत मिलेगी और शहर सुंदर लगेगा.'
इस बात से कोई इनक़ार नहीं कर रहा है लेकिन तीन महीने पहले ढहाई गई इमारतों का मलबा तक अभी नहीं हटाया गया है, इससे लोग ख़ासे परेशान हैं.
जॉनसेनगंज चौराहे से चौक की ओर जाने वाली सड़क के बाएं कोने पर एक छोटा लेकिन काफी पुराना मंदिर है. मंदिर के ठीक बगल में विद्यानंद दुबे की छोटी सी पान की दुकान है.
वो बताते हैं, "किसी समय में ये इलाहाबाद का सबसे मुख्य चौराहा था लेकिन आज इसकी दुर्गति देख लीजिए. लगभग एक साल से यहां कुछ न कुछ काम चल रहा है जिसकी वजह से नालियां जाम हो गई हैं और मंदिर के चारों ओर नाली का पानी भर गया है. लोगों का दर्शन करना मुश्किल हो रहा है."
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