तेलंगाना में 7 दिसंबर को होनेवाले चुनाव पर पूरे देश की नज़रें हैं क्योंकि ये चुनाव कहीं ना कहीं 2019 के महा-संग्राम पर असर डालेगा.
तीन महीने पहले तक ये लग रहा था कि तेलंगाना चुनाव की रेस में सिर्फ एक ही उम्मीदवार है. तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को जीता हुआ मान लिया गया था.
लेकिन अब तस्वीर कुछ बदल चुकी है. अब ये चुनाव दंगल में बदल चुका है, जहां मुक़ाबला आसान नहीं है.
लेकिन तीन महीने में ऐसा क्या हुआ कि ये चुनावी रण इस कदर दिलचस्प हो गया.
कांग्रेस ने तेल्गु देशम पार्टी और दूसरी छोटी पार्टियों के साथ मिलकर पीपुल्स फ्रंट बनाया, जिसे चंद्रशेखर राव के सामने एक कड़ी चुनौती माना जा रहा है.
अगर ये प्रयोग सफल हो जाता है तो राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है.
इससे ये संदेश पूरे देश में जाएगा कि 2019 के आम चुनाव में बीजेपी-विरोधी पार्टियां मिलकर मोदी को हराने का माद्दा रखती हैं.
इससे राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन बनाने की कोशिशों को बल मिलेगा और राज्य स्तर पर भी पार्टियां एक साथ आएंगी.
ये आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की भी बड़ी जीत होगी, जो 2019 में मोदी को हराने के लिए सभी ग़ैर बीजेपी पार्टियों को एकजुट करने की कोशिशों में लगे हैं.
तेलंगाना की 119 सीटों पर होने वाले चुनाव के तीन दावेदार हैं, उनमें से बीजेपी तीसरे नंबर पर है.
ये चुनाव केसीआर के लिए कितना चुनौतीपूर्ण है उसका अंदाज़ा चुनाव सर्वेक्षणों से मिलता है.
इनमें किसी में भी केसीआर को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिखाया गया है और कहा गया है कि पीपुल्स फ्रंट केसीआर की पार्टी को कड़ी टक्कर देने वाला है.
यहां तक की सट्टा बाज़ारों में भी माहौल टीआरएस के ख़िलाफ़ बनता ही दिख रहा है.
शुरुआत में केसीआर दावा कर रहे थे कि उसकी पार्टी 100 से ज़्यादा सीटों की बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी, लेकिन अब उनके दावों का दम निकलने लगा है.
वो ख़ुद ही अपनी हार की बातें करने लगे हैं. अपनी एक चुनावी रैली में उन्होंने कहा, "अगर टीआरएस हार जाती है तो मेरा कोई नुक़सान नहीं होगा. मैं चला जाऊंगा और अपने फ़ार्महाउस में आराम करूंगा."
ऐसा लग रहा है कि वो जनता से कह रहे हैं कि उन्होंने साढ़े चार साल अच्छा काम किया है, इसलिए अब उन्हें सत्ता में वापस लाना जनता का दायित्व है.
2014 में वो देश के सबसे युवा राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. उनकी सरकार को लोगों की बेहतरी के लिए काम करने वाली सरकार माना जाता है.
कई लोग इसे लोकप्रिय सरकार कहते हैं जिसने कल्याणकारी योजनाओं के लिए 52000 करोड़ खर्च किए.
इस सरकार ने गरीब लड़कियों की शादी के लिए आर्थिक मदद देना, किसानों की आर्थिक मदद, किसानों की हर ज़रूरत को लगातार पूरा करना, विधवाओं और बेसहारा, विकलांग और बूढ़े लोगों की पेंशन में बढ़ोत्तरी करना जैसी तमाम योजनाएं चलाईं.
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