Wednesday, February 27, 2019

परमाणु बम के नाम पर पाकिस्तान का डराना बंद होगा?

भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि भारतीय विमानों ने 26 फ़रवरी की सुबह चरमपंथी गुट जैश-ए-मोहम्मद के एक बड़े कैंप पर हमला किया.

गोखले ने इन हमलों को असैनिक और बचाव में की गई कार्रवाई बताया जिसमें बालाकोट में सबसे बड़े चरपमंथी कैंप पर हमला कर बड़ी संख्या में आत्मघाती हमले के लिए तैयार किए जा रहे चरमपंथियों को मार गिराया गया.

सुबह की रिपोर्टों में तीन जगह बालाकोट, चकोठी और मुज़फ़्फ़राबाद में हमलों की बात कही जा रही थी लेकिन विजय गोखले ने सिर्फ़ बालाकोट का ज़िक्र किया.

सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि बालाकोट पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में है, यानि ये इलाक़ा पाकिस्तान में पड़ता है, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का हिस्सा नहीं है.

प्रांत के स्थानीय लोगों ने बीबीसी उर्दू से बातचीत में तेज़ धमाके सुनने की पुष्टि की है, लेकिन क्या इन धमाकों का कारण भारतीय विमानों का हमला था, ये साफ़ नहीं है.

ख़बरों के मुताबिक़ सुरक्षाबलों ने इलाक़े को घेरे में ले लिया है, इसलिए वहां से संपर्क करना आसान नहीं.

भारतीय कार्रवाई में अभी ज़्यादा वक़्त नहीं हुआ है इसलिए अभी बहुत मामलों पर जानकारी आनी बाक़ी है. इस कारण लोग बचबचकर जवाब दे रहे हैं.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने हवाई हमले के भारतीय दावों को ख़ारिज कर दिया है और इसे भारत की आंतरिक राजनीतिक ज़रूरतों से जोड़ा है.

हमले से क्या कोई नुक़सान हुआ, इस पर अभी तक कुछ साफ़ नहीं हो पाया है.

लेकिन अगर भारतीय दावा सही है तो ये फिर ये कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है, इसे जानने के लिए बीबीसी ने भारत और पाकिस्तान में रक्षा मामलों के विशेषज्ञों और राजनयिकों से बात की.

परमाणु बम के नाम पर पाकिस्तान का डराना बंद?
पाकिस्तान में सुरक्षा मामलों की जानकार और लेखक आएशा सिद्दीक़ा के मुताबिक़ राजनीतिक और कूटनीतिक आधार पर ये हमला बेहद महत्वपूर्ण है.

वो कहती हैं, "कूटनीतिक आधार पर ये हमला महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने पाकिस्तान की (परमाणु हथियार) धमकी को झूठा साबित कर दिया है... महत्वपूर्ण बात ये है कि बालाकोट एबटाबाद के नज़दीक है (जहां लादेन को मारा गया था)."

वो कहती हैं कि पाकिस्तानी सेना की कोशिश होगी कि जिन जगहों पर हमले हुए हैं वहां से तस्वीरें कहीं बाहर न जा पाएं इससे उन्हें मामले की कुछ और तस्वीर पेश करने का मौक़ा मिलेगा.

आएशा के मुताबिक़ जिस जगह पर हमले की ख़बर आ रही है वो वहां से और जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही हैं लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है.

भारत के कॉमोडोर उदय भास्कर के मुताबिक़ ये हमला परमाणु हमले के नाम पर डराने की पाकिस्तान की नीति का टेस्ट जैसा है.

वो कहते हैं, "अभी तक यही कहा जाता था कि भारत के पास कोई विकल्प नहीं है. आज भारत ने यही कहा है कि "हमारे पास विकल्प हैं और हम उसका इस्तेमाल करेंगे. साथ ही हम ये बात दुनिया को बता रहे हैं कि हमने जो किया है वो अपनी सुरक्षा के लिए किया है."

हमलों में किए गए नुक़सान का आकलन कैसे?
पाकिस्तान में बीबीसी संवाददाता एम इलियास ख़ान के मुताबिक़ पाकिस्तान में जिन जगहों पर ये हमले हुए हैं, सालों से वहां कश्मीरी चरमपंथियों को ट्रेनिंग दी जाती रही है.

सूत्रों के आधार पर भारत में कहा जा रहा है कि भारतीय वायु सेना के इस हमले में 300 से 350 लोग मारे गए हैं और जैश के इस कैंप को भारी नुक़सान पहुंचा है. दूसरे देश के इलाक़े में हवाई हमले के बाद हुए नुक़सान की पुष्टि कितनी संभव है?

कोमोडोर उदय भास्कर के मुताबिक़ "वायु सेना का जब इस्तेमाल होता है, जिस आर्डिनेंस का आप इस्तेमाल करते हैं, उसका वीडियोग्राफ़िक एविडेंस मिल जाता है. हवा में आपके पास सैटेलाइट भी हैं. ये जानकारी दुनिया में बाहर भी मिल जाती है. आपको याद होगा कि सैटेलाइट से ऐबटाबाद में ओसामा के घर का नंबर भी पता चल गया था."

एअर मार्शल (रि) हर्ष मसंद कहते हैं कि हवाई हमले के दौरान तस्वीरें ली जाती हैं और हमले के पहले भी इंटेलिजेंस के आधार पर ये पता लगाया जा सकता है कि जिस जगह पर हमला करना है, वहां कितने लोग थे.

अभी तक इस हमले को लेकर कोई कॉकपिट वीडियो या तस्वीरें सामने नहीं आई हैं.

1971 के बाद पहला वायु हमला
रक्षा मामलों के जानकार कॉमोडोर उदय भास्कर के मुताबिक़ भारतीय कार्रवाई महत्वपूर्ण है क्योंकि 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद ये पहली बार है जब भारत ने इस तरह पाकिस्तान के ख़िलाफ़ वायु सेना का इस्तेमाल किया है.

वो कहते हैं, "ये संकेत है कि भारत इस तरह आतंक का सामना करेगा."

लाइन ऑफ़ कंट्रोल के पार जाकर हमला
इस ताज़ा हमले को 1999 के कारगिल युद्ध से जोड़कर देखा जा रहा है जब वाजपेई सरकार ने वायु सेना को लाइन ऑफ़ कंट्रोल को पार करके हमले करने की इजाज़त नहीं दी थी.

पूर्व एअर मार्शल हर्ष मसंद के मुताबिक़ कारगिल युद्ध के दौरान स्थिति थोड़ी अलग थी क्योंकि भारत हालात को और ख़राब नहीं करना चाहता था और "युद्ध लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर चल रहा था."

वो कहते हैं, "हमें एलओसी पार करने से रोका गया जिस कारण हमारे दो विमान मिग 21, मिग 23 के अलावा एक हेलिकॉप्टर का भी नुक़सान हुआ."

एअरमार्शल मसंद के मुताबिक़ अगर ज़रूरत पड़े तो वायु सेना को कहीं भी जाने की इजाज़त होनी चाहिए.

सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि भारतीय वायु सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के जिस कैंप को निशाना बनाने की बात कही है वो ख़ैबर-पख़्तूनख़्वाह प्रांत में है ना कि नियंत्रण रेखा के नज़दीक.

इसका मतलब है कि वायु सेना ने कश्मीर के आगे जाकर उस क्षेत्र को निशाना बनाया जो पाकिस्तान का इलाक़ा है.

Friday, February 8, 2019

राहुल ने कहा- राफेल में घोटाले के नए सबूत; रक्षा मंत्री बोलीं- यह मुर्दे में जान डालने की कोशिश

राफेल डील को लेकर 38 महीने पुराना रक्षा मंत्रालय का एक नोट शुक्रवार को सामने आया। इस नोट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने नवंबर 2015 में कहा था कि राफेल डील पर प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से समानांतर बातचीत की जा रही है। मंत्रालय को इस पर आपत्ति थी। इस मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘‘ये नए सबूत बताते हैं कि मोदी घोटाले के गुनहगार हैं। उन्होंने वायुसेना के 30 हजार करोड़ रुपए लूटकर अनिल अंबानी को दिए हैं।’’ हालांकि, मौजूदा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने राहुल के दावों को खारिज कर दिया।

नोट में कहा गया- प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थिति कमजोर की
अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट और न्यूज एजेंसी एएनआई की तरफ से जारी डिफेंस नोट के मुताबिक, राफेल डील पर रक्षा मंत्रालय ने 24 नवंबर 2015 को एक पत्र लिखकर पीएमओ के दखल पर ऐतराज जताया था। नोट में कहा गया था कि यह साफ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की समानांतर बातचीत से भारत और भारत के वार्ताकार दल की स्थिति कमजोर हुई है। पीएमओ के अफसरों ने फ्रांस के साथ बातचीत में जो कहा है, वह रक्षा मंत्रालय के रुख से एकदम विपरीत है। 

रक्षा सचिव ने रक्षा मंत्री से अपील की थी
इसी पर नोट पर तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के लिए एक संदेश लिखा था। इसमें कहा गया था, ''रक्षा मंत्री कृपया इस मामले को देखें। हमारी पीएमओ को सलाह है कि उनके जो अधिकारी फ्रांस से वार्ता दल में शामिल नहीं हैं, उन्हें फ्रांस सरकार के अधिकारियों से समानांतर चर्चा नहीं करनी चाहिए। अगर पीएमओ मंत्रालय की बातचीत से सहमत नहीं है तो हम इसमें बदलाव कर सकते हैं। पीएमओ की समानांतर वार्ता से सौदे में मंत्रालय और भारतीय दल की स्थिति कमजोर होगी।''

पर्रिकर ने इसे ओवर रिएक्शन बताया था
तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने रक्षा सचिव के नोट पर लिखा था- ऐसा प्रतीत होता है कि पीएमओ और फ्रांस का राष्ट्रपति कार्यालय शिखर वार्ता के फैसलों के अमल पर नजर रख रहा है। रक्षा सचिव इस मुद्दे को प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव के साथ चर्चा कर सुलझा सकते हैं। अफसरों की आपत्ति ओवर रिएक्शन है।

फ्रांसीसी वार्ता दल के प्रमुख ने पीएमओ से फोन आने पर पत्र लिखा था

मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि रक्षा मंत्रालय को पीएमओ के दखल की जानकारी फ्रांस के वार्ता दल के प्रमुख जनरल स्टीफन रेब के एक पत्र से मिली। इसमें पीएमओ के ज्वाइंट सेक्रेटरी और फ्रांस के रक्षा मंत्री के सलाहकार के बीच 20 नवंबर 2015 को फोन पर हुई बातचीत का जिक्र था।

इसके बाद रक्षा मंत्रालय और भारतीय वार्ता दल के प्रमुख एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा (एयरफोर्स के डिप्टी चीफ) की ओर से पीएमओ को पत्र लिखकर समानांतर वार्ता की जानकारी दी गई थी। 

जवाब में पीएमओ के सेक्रेटरी ने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति के कहने पर वहां के रक्षा मंत्री के सलाहकार ने उसने चर्चा की। हालांकि, सरकार ने 18 अक्टूबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राफेल सौदे में बातचीत करने के लिए दल सात सदस्य थे। एयरफोर्स के डिप्टी चीफ इसके प्रमुख थे। इसमें पीएमओ की किसी तरह की भूमिका नहीं थी।

राहुल ने सैनिकों से कहा- प्रेस कॉन्फ्रेंस जरूर देखें
राहुल ने पहले ट्वीट किया, ''देश के वीर सैनिक, आप हमारे रक्षक हो। आप देश के लिए अपनी जान तक देने को हमेशा तैयार रहते हो। आप गर्व हो हमारे। मेरी प्रेस वार्ता जरूर देखें।'' प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा कि राफेल घोटाले की परतें लगातार खुल रही हैं। अब सब कुछ साफ हो चुका है कि प्रधानमंत्री इसमें सीधे तौर पर शामिल थे। वे घोटाले के गुनहगार हैं। उन्होंने ही अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपए दिए।

राहुल ने कहा- क्या मोदी को स्किजोफ्रेनिया है?
राहुल ने कहा- फ्रांस के राष्ट्रपति ने मोदी को चोर क्यों कहा था। और आज के नोट से यह साफ हो गया है कि रक्षा मंत्रालय उनको चोर बुला रहा है। वे चोर भी हैं। एक बार मुझे देखें और एक बार प्रधानमंत्री को देखें। आपको समझ आ जाएगा कि कौन घबराया हुआ है। वे कह रहे हैं कि उल्टा चोर चौकीदार को डांटें। क्या वे दोहरे व्यक्तित्व के शिकार हैं। क्या वे खुद को चोर और चौकीदार, दोनों मानते हैं। समझ में नहीं आता है कि कभी चौकीदार बन जाते हैं, कभी चोर। क्या उन्हें स्किजोफ्रेनिया है? पर्रिकर से मुलाकात पर उन्होंने कहा कि उनसे डील को लेकर कोई बात नहीं हुई। यह सिर्फ सौजन्य भेंट थी।